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कोरोना के कारण सूना पड़ा कांवरिया पथ, बरसों पुरानी परम्परा टूटी



कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए बिहार एवं झारखंड के अटूट धार्मिक आस्था एवं वसुदेव कुटुम्बकम के प्रतीक विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले का आयोजन नहीं होने से 110 किलोमीटर लंबा कांवरिया पथ सूना पड़ गया है। कांवरिया यात्रा की बरसों पुरानी परम्परा टूट गई है।

वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर जारी दिशा-निर्देश के मद्देनजर सावन मास में एक महीने तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के आयोजन पर झारखंड सरकार के रोक लगाने के बाद झारखंड उच्च न्यायालय ने भी पाबंदी लगा दी। नतीजतन पूरा मेला क्षेत्र और करीब 110 किलोमीटर लंबे कांवरिया मार्ग पर ‘हर हर महादेव’ एवं ‘बोल-बम’ के जयघोष के बजाय सन्नाटा पसरा है। सुर-ताल एवं भक्तिमय माहौल लुप्त है।

वहीं, पूरे साल मेले के आयोजन को लेकर उत्साहित रहने वाले हजारों छोटे-बड़े व्यवसायियों को आर्थिक चोट भी सहने को मजबूर होना पड़ा है। भागलपुर, बांका, मुंगेर, देवघर और दुमका जिले के लिए एक माह तक चलने वाला कांवड़ मेला इन लोगों के लिए साल भर की रोजी-रोटी का साधन रहा है। लेकिन इस बार कोरोना की वजह से पहले लॉकडाउन और फिर मेले के आयोजन को स्थगित करने के लिए सरकार के निर्णय ने उनकी साल भर की आस को धूमिल कर दिया है।

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सावन में एक महीने तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला पर इस साल पाबंदी है। (फाइल फोटो)

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