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Mumbai News In Hindi : 40 days later DNA identified by cub’s mother; Identification was necessary, if this does not happen, the life of the cub was in danger in the forest | 40 दिन बाद डीएनए से पहचानी शावक की मां; पहचान जरूरी थी, ऐसा नहीं होता तो जंगल में शावक की जान काे खतरा था

  • जंगल में दो बाघिन शावकों के साथ घूम रही थी इसलिए पहली बार अपशिष्ट से की पहचान
  • विशेषज्ञ बोले- गंध से मां पहचान लेगी शावक को, इलाके में दो मादा बाघिन घूम रही हैं

अतुल पेठकर

Jun 04, 2020, 08:27 AM IST

नागपुर. महाराष्ट्र में चंद्रपुर के जंगल में मां से बिछड़े बाघ के शावक की डीएनए जांच कर 40 दिन बाद उसे मां से मिलाने की तैयारी कर ली गई है। यह शावक जंगल से भटकते हुए चंद्रपुर के दाबगांव में आ पहुंचा था। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह देश का पहला मामला है, जब किसी बाघ के शावक की मां की पहचान के लिए अपशिष्ट का परीक्षण किया गया है, क्योंकि इस इलाके में दो मादा बाघिन घूम रही हैं।

ट्रीटमेंट सेंटर में शावक को कोरोना से बचाने के लिए क्वारेंटाइन किया गया था

मां से बिछड़े चार महीने के शावक को वन विभाग ने 24 अप्रैल को चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर भेजा था। कोरोना के मद्देनजर सावधानी बरती गई और उसे 14 दिन क्वारैंटाइन किया गया। लक्षण सामने न आने पर उसकी मां की तलाश शुरू हुई।

दरअसल, इलाके में दो मादा बाघिन अपने बच्चों के साथ रह रही हैं। वन विभाग को डर था कि यदि गलत बाघिन के पास शावक गया तो उसे वह स्वीकार नहीं करेगी। तब दोनों बाघिन के मल के नमूने जांच के लिए हैदराबाद के सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्यूलर बायोलॉजी भेजा गया था।

शावक को उसकी वास्तविक मां के पास छोड़ना जरूरी थाः प्रधान वनसंरक्षक

मंगलवार को वहां से रिपोर्ट आ गई और पता चला कि टी-2 बाघिन ही उस शावक की मां है। महाराष्ट्र के प्रधान वनसंरक्षक नितिन काकोड़कर ने बताया कि शावक को उसकी वास्तविक मां के पास छोड़ना जरूरी था। यदि ऐसा नहीं करते तो उसकी जान को खतरा हो सकता था।

दाबगांव इलाके में दो बाघिन हैं और दोनों के तीन-तीन शावक हैं। ऐसे में वन विभाग ने उन्हें टी-1 और टी-2 नाम दिए थे। अब रिपोर्ट से पुष्टि हो गई है कि टी-2 बाघिन उस शावक की मां है। ट्रांजिट सेंटर से यह बाघिन महज 7-8 किमी के क्षेत्र में भ्रमण कर रही है।

अब नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथरिटी की गाइडलाइंस के तहत शावक को मां के पास छोड़ा जाएगा। क्या बाघिन शावक को पहचान लेगी? इस पर वन्यप्राणी विशेषज्ञ मारुति चितमपल्ली ने बताया कि शावकों को दिन के उजाले में देखने में दिक्कत होती है। बाघिन उन्हें गुफा में छोड़कर शिकार करने जाती है।

इस दौरान कई शावक बाहर निकलकर भटक जाते हैं। हालांकि, बाघिन गंध के आधार पर शावक को पहचान लेती है। इस वजह से घबराने की जरूरत नहीं है।

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