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Patna News In Hindi : Sheeppura’s Panapur Panchayat becomes an island during the rains | बारिश के दौरान टापू बन जाती है शेखपुरा की पानापुर पंचायत

दैनिक भास्कर

Jul 14, 2020, 08:35 AM IST

शेखपुरा. घाटकुसुम्भा प्रखंड की पानापुर पंचायत में कई दशकों के बाद भी विकास की रोशनी  नहींं पहुंची है। यहां के ग्रामीण गांव के समस्याओं के मकड़जाल में उलझ कर रह गए है। गांव की समस्या को रूबरू कराते हुए ग्रामीणों ने बताया कि यहां  तो हमलोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए जूझना तो पड़ता है किंतु अभी सबसे बड़ी विकट समस्या आवागमन का है। पानापुर से बाउघाट तक जाने वाली कच्ची सड़क जगह-जगह गढ्ढो में तब्दील है और रुक-रुक कर हो रही बारिश से इस पथ पर आवागमन पूरी तरह बाधित है और ग्रामीण कीचड़ में बाउघाट तक पैदल चलकर जाते है। पानापुर पंचायत की आबादी लगभग 12 हजार की है। पंचायत में अधिकांश अनुसूचित जाति के लोग निवास करते हैं। गांव की भौगोलिक स्थिति यह है कि तीन तरफ से हरोहर, सोमे और एक तरफ सोता से घिरा हुआ है। बरसात के दिनों में प्रखंड के लिए यह पंचायत टापू बन जाता है। इस पंचायत के बारे में ना तो सरकार का ध्यान होता है और ना ही किसी जनप्रतिनिधि का। यह क्षेत्र बाढ़ और बरसात दोनों तरफ से जल से घिर जाता है। यहां के लोगों को करीब चार माह तक पानी में तैरकर या ग्रामीणों के द्वारा बनाए गये चचरी पूल से होकर आवागमन करना पड़ता है।
50 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई लिखाई से हैं कोसों दूर 
महादलित बाहुल्य पंचायत होने के कारण यहां 50 प्रतिशत बच्चे आज भी शिक्षा से दूर है। पंचायत में स्कूल तो नाममात्र का ही है। स्कूल के बदले बच्चे नदी में मछली का शिकार करते, गाय-भैंस व बकरी चराते नजर आते हैं। बरसात के दिनों में पंचायत के लोगों को प्रखंड मुख्यालय आने के लिए 15 किलोमीटर की दूरी तय करके आना पड़ता है। जबकि प्रखंड मुख्यालय से गांव की दूरी भले ही पांच से छह किलोमीटर है, परंतु यातायात के दृष्टिकोण से यह गांव कोसों दूर है। अगर गांव में कोई बड़े-बूढ़े या गर्भवती महिला अचानक बीमार पड़ जाए तो उसे खटिया पर टांग कर स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ता है। बरसात के बाद भी लोगों को गांव जाने के लिए पगडंडियों का ही सहारा लेना पड़ता है।

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