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USProtest Today | George Floyd Protests (American Riots) Ground Report Updates: Violence in United States | जॉर्ज फ्लायड की मौत के बाद भड़की हिंसा से देश में गृहयुद्ध जैसे हालात, हजारों निर्दोषों के घर-कारोबार बर्बाद

  • लोगों को दुकानें खोलने में डर लग रहा, वे प्रदर्शनकारियों को देखकर दहशत में आ जाते हैं
  • पूरे अमेरिका में अब तक लगभग 9 हजार प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए या हिरासत में लिए गए

डेलावेयर से रेखा पटेल

डेलावेयर से रेखा पटेल

Jun 04, 2020, 06:06 PM IST

मिनियापोलिस. अमेरिका के मिनियापोलिस में 41 साल के मूर का रेस्टारेंट जल कर खाक हो गया। 24 घंटे बाद भी वहां से धुआं उठ रहा है। रोते हुए मूर कहते हैं, ‘अब मुझे न्याय चाहिए।’ ये है अमेरिका, जहां स्वतंत्रता और न्याय को सबसे ऊपर माना जाता है। ऐसे मूर तो यहां हजारों होंगे, जिनका कारोबार जल कर खाक हो गया है। 

मेहनतकश लोग अब न्याय मांग रहे हैं, तो इसमें उनका क्या कसूर? जॉर्ज फ्लायड की मौत के विरोध में न्याय के लिए संघर्ष अगर शांतिपूर्ण होता, तो ज्यादा ठीक होता, लेकिन उसके कारण हुई हिंसा ओर लूट में हजारों लोगों का कारोबार चौपट हो गया, घर बर्बाद हो गए। इस घटना के आठ दिन बाद भी यहां कारोबारी शाम होते ही सहम जाते हैं और दुकानें जल्द ही बंद कर घर चले जाते हैं। कोरोनावायरस संक्रमण के दौर में लगी बंदिशों में छूट के बाद भी कई लोग हिंसा के कारण बिजनेस शुरू नहीं कर पा रहे।

देश भर में 9300 लोगों की धरपकड़
फ्लायड की मौत के विरोध में अमेरिका में सड़कों पर उतरे करीब 9300 प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ की गई है। कई शहरों में कर्फ्यू होने के बाद भी यूएस नेशनल गार्ड की मौजूदगी में लोग विरोध कर रहे हैं। कई स्थानों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। इसके चलते अकेले मिनियापोलिस में 170 से अधिक व्यवसाय नष्ट हो गए। इसके अलावा न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स जैसे प्रमुख शहरों में महंगी दुकानें लगभग ध्वस्त हो गईं। लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। 

आठ दिन बाद भी विरोध-प्रदर्शन जारी
भेदभाव किसी भी तरह से उचित नहीं है। अमेरिका में श्वेत-अश्वेत के बीच रंगभेद है। ये दो अलग-अलग प्रजातियां हैं। गोरे मूल रूप से यूरोपीय देशों से आए थे और अश्वेत अफ्रीकी देशों से। इन दोनों के रंग, रूप, बोली और सोच सभी बहुत अलग हैं। इसलिए दोनों के बीच एक अंतर होना स्वाभाविक है। इस अंतर ने दोनों के बीच खाई पैदा कर दी है। इसी का नतीजा है कि ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन आज एक चिंगारी आंदोलन की आग बनकर पूरे अमेरिका में फैल गई है।

लगता है कि अमेरिका में अब बदलाव तय है
हर व्यक्ति को समान अधिकार के साथ जीने का हक है। सिर्फ रंग के कारण किसी व्यक्ति की पहचान करना मानवीय नहीं है। बीसवीं सदी में आदमी को काम से पहचाना जाना चाहिए। रूढ़िवादी विचारों की अवहेलना करनी चाहिए। ये सभी मांगें जायज हैं, लेकिन इन्हें शांति से किया जाना चाहिए। जिस तरह से अब लाखों लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, उससे यही लगता है कि अब बदलाव तय है।

सेना सड़कों पर उतरी तो यह शर्मनाक होगा
इस घटना के मद्देनजर, एक और समूह कहर बरपा रहा है, अमेरिका में तोड़फोड़ के साथ जनता को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है। इसके लिए अमेरिकी सेना को सड़कों पर उतरना पड़े, यह शर्म की बात है। दंगों को रोकने के लिए हजारों पुलिस तैनात की गई है, जिससे देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो गए हैं।

प्रदर्शनकारियों में लुटेरे शामिल हो गए हैं
न्यूयॉर्क शहर में, विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में सोमवार रात और मंगलवार सुबह 700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार ये सभी लुटेरे और चोर हैं। ह्यूस्टन से 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया। लॉस एंजिल्स में प्रदर्शनकारियों ने भारी तबाही मचाई। तोड़फोड़, लूटपाट, पत्थरबाजी, आगजनी और स्केटबोर्ड के साथ स्ट्रीट लाइट्स को तोड़ दिया गया। यहां एक हजार से अधिक गिरफ्तारियां हुईं।अब देखना यह है कि जिनके व्यवसाय को भारी नुकसान हुआ है, इंश्योरेंस उनकी कितनी मदद कर सकता है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि सोने की नगरी अमेरिका बहुत ही जल्द अपने मूल स्वरूप में आ जाए। लोग जितना अपनी मातूभूमि को चाहते हैं, उतनी ही इज्जत अपनी कर्मभूमि को भी देते हैं। “God Bless America”

(यह ग्राउंड रिपोर्ट अमेरिका के डेलावर से रेखा पटेल ने भास्कर के लिए तैयार की है। रेखा ने कई किताबें लिखी हैं। पिछले 20 सालों से वे कई मैगजीन और न्यूज पेपर से जुड़ी हुई हैं।)

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